प्रदेश के 5 लाख युवाओं को 'एआई फ्लुएंट' (एआई के उपयोग में कुशल) बनाया जाएगा. राज्य में 50 हजार फॉरवर्ड डिप्लॉयड एआई विशेषज्ञ (Experts) तैयार करने का लक्ष्य है. कम से कम 100 नए एआई स्टार्टअप्स को वित्तीय (Financial) और गैर-वित्तीय सहायता दी जाएगी. सरकारी कामकाज और जन-सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 100 से अधिक एआई यूज-केसेस (समाधान) विकसित किए जाएंगे, जिनमें से 25 से 30 को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा.
हर जिले में एआई केंद्र और कौशल लैब
जिला एआई केंद्र (District AI Center): उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक जिला एआई केंद्र स्थापित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री एआई फेलोशिप: हर जिले में एक-एक 'एआई फेलो' की नियुक्ति होगी। इन्हें 40,000 रुपये प्रति माह मानदेय पर एक वर्ष के लिए रखा जाएगा, जिसका हर साल नवीनीकरण किया जा सकेगा.
200+ एआई कौशल लैब: प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, आईटीआई (ITI) और विश्वविद्यालयों में 200 से अधिक एआई कौशल लैब बनाई जाएंगी. यहाँ एआई, डेटा साइंस और रोबोटिक्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर 1 लाख तकनीकी शिक्षार्थियों को प्रमाणित किया जाएगा.
सरकारी कामकाज में सुधार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
यूपी एआई स्टैक : सरकारी सेवाओं को तेज, सरल और प्रभावी बनाने के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा. इस प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न सरकारी विभागों को एआई के लिए तैयार सुरक्षित डेटा, समाधान उपकरण और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) आधारित कंप्यूटिंग क्षमता मिलेगी.
मिशन के 7 प्रमुख आयाम
यूपी एआई मिशन को मुख्य रूप से इन 7 क्षेत्रों में लागू किया जाएगा:
1. साझा एआई प्लेटफॉर्म (यूपी एआई स्टैक एवं डेटा एक्सचेंज)
2. डेटा एवं एआई सेवाएं
3. कौशल विकास (एआई टैलेंट एवं फ्यूचर स्किल्स)
4. शोध एवं उत्कृष्टता केंद्र (AI Research & Centers of Excellence)
5. स्टार्टअप और एमएसएमई (MSME) को प्रोत्साहन
6. कंप्यूटिंग एवं डिजिटल ढांचा
7. सुरक्षित एआई का उपयोग (AI Trust & Assurance) और जिला स्तर पर सुविधाओं का विस्तार
इसके सुचारू संचालन के लिए राज्य स्तर पर एक शीर्ष निकाय, शासी निकाय और कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा.
