9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
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एंटी करप्शन टीम का जाल (दबिश), टीम को अचानक अपने सामने देखकर लेखपाल कमरे में बंद होकर गैस चूल्हे पर जलाए नोट I

✍ Mamta Singh 📅 9 अक्टूबर 2026 👁 9 बार पढ़ा गया
एंटी करप्शन टीम का जाल (दबिश), टीम को अचानक अपने सामने देखकर लेखपाल कमरे में बंद होकर गैस चूल्हे पर जलाए नोट I

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन टीम) की एक ऐसी अनोखी और हैरान कर देने वाली कार्रवाई सामने आई है। घूसखोर लेखपाल ने पकड़े जाने के डर से सबूत मिटाने के लिए रिश्वत के नोटों को गैस चूल्हे पर रख कर जला दिया और बची हुई राख को किचन के सिंक में बहा दिया। हालांकि, उसकी यह चालाकी काम नहीं आई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस फिल्मी अंदाज वाले घटनाक्रम की पूरी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

🧑‍बदमाश की पहचान और मामला

विपुल तिवारी, जो मूल रूप से प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है और ललितपुर के ग्राम टौरिया क्षेत्र में तैनात था।  टौरिया गांव के निवासी मनोज कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी एक जमीन पर कब्जा बरकरार रखने और राजस्व विभाग की धारा 30(2) की कार्रवाई में उसके पक्ष में रिपोर्ट लगाने के एवज में लेखपाल ₹20,000 की रिश्वत मांग रहा था। बाद में सौदा ₹15,000 में तय हुआ।

🪤 एंटी करप्शन टीम का जाल (दबिश)

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) की झांसी इकाई के इंस्पेक्टर शादाब खान के नेतृत्व में एक टीम ने जाल बिछाया। गुरुवार (08 अक्टूबर 2026) दोपहर करीब 3:00 बजे जैसे ही पीड़ित मनोज कुमार ने लेखपाल विपुल तिवारी को आजादपुरा इलाके में स्थित उसके किराये के मकान पर ₹15,000 की पहली किस्त सौंपी, बाहर मुस्तैद टीम ने छापा मार दिया।

कमरे में बंद होकर गैस चूल्हे पर जलाए नोट

टीम को अचानक अपने सामने देखकर लेखपाल के होश उड़ गए। वह तुरंत पैसे लेकर कमरे के अंदर भागा और दरवाजा अंदर से बंद (लॉक) कर लिया। रंगे हाथों पकड़े जाने के सबूत को मिटाने के लिए उसने आव देखा न ताव, सीधे किचन के गैस चूल्हे पर नोटों की गड्डी रख दी और आग लगा दी। इसके बाद जलते हुए नोटों के अवशेष और राख को उसने सिंक के नाले (ड्रेन) में बहाने की कोशिश की।

दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी टीम, खुला राज

जब लेखपाल ने काफी आवाज देने पर भी दरवाजा नहीं खोला, तो एंटी करप्शन टीम ने बल प्रयोग करते हुए दरवाजा तोड़ दिया। कमरे के अंदर कदम रखते ही पूरी जगह कागज जलने का गाढ़ा धुआं भरा हुआ था। टीम ने तुरंत किचन के सिंक और नाली से भारतीय मुद्रा (नोटों) के अधजले टुकड़े और अवशेष बरामद कर लिए। केमिकल टेस्ट ने खोली पोल

भले ही लेखपाल ने नोट जला दिए थे, लेकिन वह यह भूल गया था कि एंटी करप्शन टीम ने नोटों पर पहले से ही एक विशेष केमिकल (फिनोलफ्थलीन पाउडर) लगा रखा था। जब अधिकारियों ने लेखपाल विपुल तिवारी के हाथों को एक रासायनिक घोल (पानी) से धुलवाया, तो पानी का रंग तुरंत बदलकर गुलाबी हो गया। यह इस बात का अचूक वैज्ञानिक प्रमाण था कि उसने रिश्वत के पैसों को छुआ था।

आगे की कानूनी कार्रवाई

एंटी करप्शन टीम ने इस पूरी घटना और जले हुए नोटों के अवशेषों का वीडियो साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज भी हासिल किया है। आरोपी लेखपाल के खिलाफ ललितपुर के कोतवाली पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उसे गिरफ्तार कर झांसी ले जाया गया है, जहां उसे विशेष मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर जेल भेजा जा रहा है।

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