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12,000 किलोमीटर दूर कनाडा के टोरंटो से आए एक बुजुर्ग दंपती ने 155 साल बाद अपने पूर्वजों की जन्मभूमि को खोज निकाला

✍ Mamta Singh 📅 9 अक्टूबर 2026 👁 12 बार पढ़ा गया
12,000 किलोमीटर दूर कनाडा के टोरंटो से आए एक बुजुर्ग दंपती ने 155 साल बाद अपने पूर्वजों की जन्मभूमि को खोज निकाला

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक बेहद भावुक करने वाली खबर है। आज से करीब 155 साल पहले बलिया से गिरमिटिया मजदूर के रूप में विदेश गए एक परिवार की कनाडा में रह रही चौथी पीढ़ी अपने पूर्वजों की तलाश में यूपी पहुंची। करीब 15 दिनों की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद आखिरकार उन्होंने बलिया में अपने पैतृक ठिकाने और परिवार की जड़ों को ढूंढ निकाला है। यह भावुक कहानी अपनी मिट्टी के प्रति उस असीम लगाव को दर्शाती है जो पीढ़ियां बदलने के बाद भी खत्म नहीं होता।

टोरंटो से बलिया पहुंचे विदेशी मेहमान

कनाडा के टोरंटो में रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग असगर अली (इमतेज) और उनकी पत्नी वर्नी अलाय अपने पूर्वजों के इतिहास को खंगालते हुए उत्तर प्रदेश के बलिया जिले पहुंचे। असगर अली के परदादा को आज से करीब 155 साल पहले (वर्ष 1871 में) ब्रिटिश शासनकाल के दौरान गिरमिटिया मजदूर बनाकर पहले कलकत्ता (अब कोलकाता) और फिर वहां से सात समंदर पार कनाडा ले जाया गया था।

1871 का ऐतिहासिक दस्तावेज बना सहारा

पीढ़ियां बदलती गईं और परिवार पूरी तरह कनाडाई संस्कृति में ढल गया, लेकिन अपनी जड़ों को देखने और पूर्वजों की धरती को चूमने की चाहत हमेशा जिंदा रही। इस बुजुर्ग दंपती के पास वर्ष 1871 का अंग्रेजों के जमाने का एक पुराना इमिग्रेशन पेपर (प्रवासन पर्ची) सुरक्षित था, जिस पर एक अंग्रेज अधिकारी के हस्ताक्षर और धुंधला सा पता दर्ज था। इसी एक कागज के टुकड़े को लेकर यह कपल भारत पहुंच गया।

15 दिनों की कड़ी मशक्कत और स्थानीय मदद

बलिया पहुंचने के बाद राह इतनी आसान नहीं थी, क्योंकि 155 सालों में गांवों के नाम, नक्शे और प्रशासनिक सीमाएं पूरी तरह बदल चुकी थीं। दंपती ने स्थानीय स्तर पर खोजबीन शुरू की और शनिवार को खरसरा ग्राम पंचायत के पंचायत सचिव मिथिलेश कुमार पांडेय से मुलाकात कर वह ऐतिहासिक पर्ची दिखाई।

पंचायत सचिव और स्थानीय ग्रामीणों ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों के आधार पर कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। करीब 15 दिनों की लगातार खोजबीन और गहरी छानबीन के बाद आखिरकार पुख्ता सुराग हाथ लगा।

'बेलौना टोला' में मिलीं पुरखों की जड़ें

सारे सुरागों को मिलाने के बाद यह साफ हो गया कि असगर अली (इमतेज) के पूर्वज बलिया के खरसरा ग्राम पंचायत के 'बेलौना टोला' के रहने वाले थे। पंचायत सचिव खुद इस बुजुर्ग दंपती को लेकर बेलौना टोला पहुंचे। जैसे ही इस बुजुर्ग कनाडाई दंपती ने अपने पुरखों की इस पावन धरती पर कदम रखा, वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और बेहद भावुक हो उठे। चूंकि 155 साल का एक लंबा वक्त बीत चुका है, इसलिए गांव में उनके पूर्वजों का वह पुराना घर अब अस्तित्व में नहीं है और न ही उनके परिवार का कोई भी अंश (सगा-संबंधी) अब वहां रहता है। इसके बावजूद, अपने पूर्वजों के गांव की मिट्टी को छूकर और वहां के लोगों से मिलकर दंपती को आत्मिक शांति मिली। उन्होंने इस खोज में मदद करने वाले स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीणों का दिल से आभार व्यक्त किया। यह कहानी सोशल मीडिया और मीडिया में लोगों का खूब ध्यान खींच रही है।

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