आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन : 11वीं कक्षा के छात्र फैसल खान ने बताया कि उन्होंने 25 जुलाई को आर्य समाज मंदिर में पूरे विधि-विधान और कानूनी प्रक्रिया के तहत धर्म परिवर्तन किया था. सनातन धर्म में वापसी करने के बाद उन्होंने अपना नया नाम 'ईशान जाट' रखा है. ईशान (पूर्व नाम फैसल) ने अपनी इस घर वापसी को लेकर बताया कि उनके पूर्वज भी मूल रूप से हिंदू ही थे. किसी कारणवश उनके दादा-परदादाओं ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था. ईशान के मुताबिक, इस बात की जानकारी खुद उनके माता-पिता ने उन्हें दी थी.
हिंदू धर्म में बचपन से रुचि: युवक का कहना है कि बचपन से ही उसकी आस्था हिंदू रीति-रिवाजों, देवी-देवताओं और पूजा-पाठ में रही है. इसी गहरी आस्था के चलते उसने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से सनातन धर्म में लौटने का निर्णय लिया. ईशान के पिता का नाम सलीम खान था, जिनका 3 वर्ष पूर्व देहांत हो चुका है. वह वर्तमान में अपनी माता निखत परवीन के साथ रहते हैं. ईशान ने सरकारी दस्तावेजों में भी अपना नाम बदलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए उन्होंने 29 सितंबर को जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में एक कानूनी शपथ पत्र भी सौंपा है, जिसमें उनके स्वेच्छा से धर्म बदलने और पूर्वजों के हिंदू होने का स्पष्ट उल्लेख है.
प्रशासनिक बयान:
इस मामले पर फिरोजाबाद के डीएम संतोष कुमार शर्मा का कहना है कि मीडिया में मामला आने तक यह शपथ पत्र व्यक्तिगत रूप से अभी उनके सामने पेश नहीं हुआ है, हालांकि कागजी प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है. ईशान ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया उन्होंने पूरी तरह से कानूनी दायरे में और बिना किसी डर, प्रलोभन या दबाव के की है.
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के कानूनी नियम
उत्तर प्रदेश में 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम' लागू है, जिसके तहत किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव, जबरदस्ती या कपट से धर्म बदलना अपराध है. यदि कोई व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निम्नलिखित कानूनी कदम उठाने पड़ते हैं:
जिला मजिस्ट्रेट को एडवांस नोटिस: स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को एक तय प्रारूप पर घोषणा पत्र (Declaration Form) देना होता है कि वह बिना किसी दबाव या प्रलोभन के धर्म बदल रहा है. जो धार्मिक गुरु या संस्था (जैसे आर्य समाज के आचार्य) यह धर्म परिवर्तन कराने वाले हैं, उन्हें भी कार्यक्रम से एक महीने पहले DM कार्यालय को सूचित करना अनिवार्य होता है.
पुलिस वेरिफिकेशन और जांच: नोटिस मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस इस बात की जमीनी स्तर पर जांच करती है कि यह फैसला पूरी तरह से सुरक्षित, स्वतंत्र और व्यक्तिगत है या नहीं.
सार्वजनिक गजट : धर्म बदलने के बाद व्यक्ति को दो स्थानीय समाचार पत्रों में नाम और धर्म परिवर्तन का विज्ञापन देना होता है तथा सरकारी गजट में इसे दर्ज कराने के लिए अफ़ीडेविट (Affidavit) जमा करना होता है, ताकि सभी सरकारी दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड, मार्कशीट) में नया नाम और धर्म मान्य हो सके
