15 अक्टूबर 2026, गुरुवार
ब्रेकिंग
बॉलीवुड अभिनेता और सुपरस्टार आमिर खान के भांजे अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का आदेश ! सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये का हिसाब गायब योगी आदित्यनाथ का 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी राजनीतिक घेराबंदी का आक्रामक प्रयास, अखिलेश यादव की छवि और पार्टी को धक्का I लखनऊ के दुबग्गा में महुआ इलाके में छापेमारी कर 13 करोड़ रुपये 6.4 किलोग्राम मॉर्फिन के साथ 2 अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार शिक्षक भर्तियों को लेकर शासन का कानूनी और व्यावहारिक रुख बिल्कुल अलग-अलग योगी सरकार की 68,000 ग्राम प्रहरियों को बड़ी सौगात: मानदेय बढ़ा, मिला ₹5 लाख का बीमा कवच, थानेदार हर हफ्ते करेंगे ग्राम प्रहरियों के साथ बैठक I
राज्य

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये का हिसाब गायब

✍ Mamta Singh 📅 15 अक्टूबर 2026 👁 21 बार पढ़ा गया
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये का हिसाब गायब

सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 416.14 करोड़ रुपये का हिसाब गायब होने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में एक नई एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है. रामपुर जेल में बंद आजम खान से ईडी के अधिकारियों द्वारा साढ़े सात घंटे से अधिक की लंबी पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की गई है.

ईडी की इस शिकायत के बाद दर्ज मामले की पूरी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है :-

एफआईआर में नामजद 5 मुख्य आरोपी

यह प्राथमिकी ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय के उप निदेशक पीयूष एस. थोरेट की शिकायत पर दर्ज हुई है. इसमें मुख्य रूप से पांच लोगों/संस्थाओं को नामजद किया गया है:

1.     मोहम्मद आजम खान (संस्थापक व मुख्य ट्रस्टी)

2.     मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट (विश्वविद्यालय का संचालन करने वाला ट्रस्ट)

3.     मेसर्स ए.एस. एंटरप्राइजेज (निजी कॉन्ट्रैक्टर फर्म)

4.     मेसर्स सी.के. एसोसिएट्स (निजी कॉन्ट्रैक्टर फर्म)

5.     अन्य संबंधित बिचौलिए और सहयोगी

इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), धोखाधड़ी (Cheating) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. 

416 करोड़ रुपये का गणित और गड़बड़ी

ईडी ने अपनी जांच में आयकर विभाग (Income Tax) की जिला मूल्यांकन अधिकारी की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है, जिसमें खर्चों का बहुत बड़ा अंतर पकड़ा गया I मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी विभिन्न आलीशान इमारतों की वास्तविक निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई I इसके विपरीत, जौहर ट्रस्ट ने वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच अपने आयकर रिटर्न (ITR) में यूनिवर्सिटी निर्माण का पूंजीगत व्यय महज 78.32 करोड़ रुपये ही दिखाया I दोनों आंकड़ों के बीच 416.14 करोड़ रुपये का भारी अंतर मिला. आजम खान और उनका ट्रस्ट ईडी के सामने यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि यह 416 करोड़ रुपये कहाँ से आए और किसके माध्यम से निर्माण में लगाए गएI

जांच में सामने आया हेरफेर का तरीका (Modus Operandi)

ईडी के मुताबिक, आजम खान ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी धन और संसाधनों को निजी यूनिवर्सिटी की तरफ मोड़ा I आरोप है कि आजम खान के प्रभाव से चुनिंदा ठेकेदारों (जैसे सी.के. एसोसिएट्स) को करोड़ों रुपये के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट दिए गए. इन ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों से मिले मुनाफे का एक हिस्सा कमीशन या दान (Donation) के रूप में वापस जौहर ट्रस्ट के खातों में रूट कर दिया. उदाहरण के लिए, ए.एस. एंटरप्राइजेज को 25 करोड़ का सरकारी काम मिला, जिसमें से उसने 40 लाख रुपये ट्रस्ट को दान दे दिए.

सरकारी धन से निजी कैंपस में निर्माण

परिसर के अंदर यूपी जल निगम की सीएंडडीएस यूनिट के जरिए 85.81 करोड़ रुपये के काम सीधे सरकारी पैसे से करवाए गए. इसमें सरकारी बजट से स्वीकृत भव्य पंडाल, ओबीसी बॉयज हॉस्टल और एक अस्पताल का निर्माण शामिल है, जिन्हें बाद में निजी यूनिवर्सिटी को सौंप दिया गया. इसके अतिरिक्त, विधायक/एमएलसी निधि से भी कैंपस के अंदर 6.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

आगामी कानूनी कार्रवाई की स्थिति

इस नई एफआईआर के दर्ज होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ-साथ अब केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस मामले को अपनी विस्तृत जांच में शामिल करेगी. इसके तहत आने वाले दिनों में जौहर ट्रस्ट से जुड़ी अवैध संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Seize) करने और शामिल ठेकेदारों व करीबियों पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज की जाएगी.

 मेरठ की संस्थाओं (KSD चैरिटेबल ट्रस्ट आदि) का कनेक्शन

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच में जौहर ट्रस्ट को मिले करोड़ों रुपये के दान (Donation) की प्रामाणिकता और उसकी प्रकृति पर गंभीर सवाल उठाए हैंI संदिग्ध वित्तीय रूटिंग ईडी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच मेरठ के केएसडी (KSD) चैरिटेबल ट्रस्ट और सिटी एजुकेशनल सोशल वेलफेयर सोसाइटी जैसी संस्थाओं से मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को कुल 6.235 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ था.

ठेकेदारों और कमीशन का खेल: ईडी को संदेह है कि यह कोई सामान्य या परोपकारी दान नहीं था. आरोप है कि तत्कालीन समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के दौरान जिन निजी ठेकेदारों और संस्थाओं को भारी-भरकम सरकारी टेंडर व कॉन्ट्रैक्ट देकर लाभ पहुंचाया गया था, उन्होंने अपने उसी मुनाफे (प्रॉफिट मार्जिन) का एक हिस्सा या कमीशन इन शिक्षण संस्थाओं व ट्रस्टों के जरिए घुमाकर (Route) दान के रूप में आजम खान के जौहर ट्रस्ट में जमा कर दिया.

अवैध धन को वैध बनाना: एजेंसी का मानना है कि यह सीधे तौर पर सरकारी धन के डायवर्जन और ब्लैक मनी को वाइट मनी (लॉन्ड्रिंग) में बदलने का एक वित्तीय जाल था, ताकि यूनिवर्सिटी के भव्य निर्माण के लिए गुप्त रूप से फंड जुटाया जा सके.

जांच अधिकारी और प्रशासनिक कमान

रामपुर के अजीमनगर थाने में केस दर्ज होने के बाद इस मामले की स्थानीय स्तर पर विवेचना और कमान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है I रामपुर पुलिस प्रशासन ने इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी शुरुआती विवेचना और ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग सीओ टांडा (क्षेत्राधिकारी, टांडा) को सौंपी है। क्षेत्राधिकारी (CO) स्तर के राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में अजीमनगर थाने की पुलिस और स्थानीय एक्सपर्ट्स की एक विशेष टीम गठित की गई है जो मनी ट्रेल के दस्तावेजों की भौतिक जांच करेगी।

केंद्रीय व स्थानीय जांच का समन्वय: चूंकि यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर दर्ज हुआ है, इसलिए स्थानीय पुलिस (जैसे सीओ टांडा) प्राथमिकी के आधार पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सरकारी धन की चोरी (IPC/BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत) की जांच करेगी. इसके समानांतर, लखनऊ जोनल कार्यालय की ईडी (ED) की टीम मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत इस अवैध धन से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की स्वतंत्र कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी.

यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने के नोटिस की वर्तमान स्थिति

रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी किए गए ध्वस्तीकरण (Demolition) आदेश पर वर्तमान में कानूनी रोक (Stay) लगी हुई है। इस मामले का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार हैI जुलाई 2026 में रामपुर विकास प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत यूनिवर्सिटी परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध घोषित करते हुए उन्हें 15 दिनों के भीतर गिराने का आदेश दिया था।

अवैध निर्माण का कारण : जांच और पैमाइश में सामने आया कि पूरे 250 एकड़ के भव्य परिसर में केवल मेडिकल कॉलेज और एक मुख्य प्रशासनिक ब्लॉक का नक्शा ही स्वीकृत था। शेष 38 इमारतें (जैसे हॉस्टल, पंडाल, अस्पताल आदि) बिना किसी स्वीकृत मैप (Approved Plan) के अवैध रूप से खड़ी की गई थीं।

यूनिवर्सिटी का तर्क : जौहर ट्रस्ट ने दलील दी थी कि जब इन इमारतों का निर्माण (2004-2006 के बीच) शुरू हुआ था, तब सिंगनखेड़ा गांव का यह इलाका RDA के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। हालांकि, प्राधिकरण ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उस समय भी सक्षम जिला पंचायत या स्थानीय निकाय से मंजूरी लेना अनिवार्य था।

कोर्ट से अंतरिम राहत : इस आदेश के खिलाफ छात्रों के कड़े विरोध प्रदर्शनों और यूनिवर्सिटी के वकीलों की अपील के बाद, मुरादाबाद के कमिश्नर (जो RDA के चेयरमैन भी हैं) की अदालत ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी है। मामला अभी न्यायाधीन है, इसलिए फिलहाल किसी भी इमारत को गिराया नहीं जा रहा है।

CA दीपक गोयल से पूछताछ में हुए मुख्य खुलासे

आजम खान और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के वित्तीय खातों की देखरेख करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) दीपक गोयल से ईडी (ED) की लखनऊ जोनल टीम ने कई घंटों तक गहन पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं। इस पूछताछ में मुख्य रूप से निम्नलिखित वित्तीय विसंगतियां और खुलासे सामने आए हैं:

फंड की 'लेयरिंग' और रूटिंग का खुलासा : पूछताछ में ट्रस्ट के खातों में प्राप्त होने वाले करोड़ों रुपये के संदिग्ध दान (Donations) की एंट्रीज की जांच की गई। सीए से उन रास्तों (Money Trail) की कड़ियों को सत्यापित कराया गया, जिनके माध्यम से विभिन्न निजी कंपनियों, शिक्षण संस्थाओं (जैसे मेरठ की संस्थाएं) और सरकारी ठेकेदारों से पैसा घूमकर ट्रस्ट के खातों में पहुंचा।

दस्तावेजों और बैलेंस शीट का मिलान : ईडी के अधिकारियों ने आयकर रिटर्न (ITR) में दिखाए गए खर्च (78.32 करोड़ रुपये) और निर्माण की वास्तविक लागत (494.46 करोड़ रुपये) के बीच के 416.14 करोड़ रुपये के भारी अंतर (खर्चों के हेरफेर) को लेकर सीए से वित्तीय प्रविष्टियों (Accounting Entries) की वास्तविकता पूछी।

सरकारी धन के डायवर्जन का लेखा-जोखा : पूछताछ में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया कि सरकारी टेंडर पाने वाले ठेकेदारों ने किन खातों और किन प्रस्तावों के माध्यम से 'दान' की शक्ल में मुनाफा वापस आजम खान की निजी यूनिवर्सिटी के निर्माण कार्य में लगाया था।

CA दीपक गोयल और जौहर यूनिवर्सिटी के कुलसचिव से मिले दस्तावेजी सबूत

CA दीपक गोयल और जौहर यूनिवर्सिटी के कुलसचिव (VC) से मिले इन दस्तावेजी सबूतों और बयानों के आधार पर ही, ईडी की टीम ने रामपुर जेल जाकर सीधे आजम खान से 8 घंटे की पूछताछ की, जिसके बाद आजम खान समेत 5 आरोपियों पर यह नया बड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक नसीर अहमद खान से करीब 7 घंटे तक गहन पूछताछ

जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर की चमरौआ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक नसीर अहमद खान से करीब 7 घंटे तक गहन पूछताछ की है। नसीर अहमद खान को आजम खान का बेहद करीबी माना जाता है और वे जौहर ट्रस्ट के संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं। ईडी के समन पर लखनऊ जोनल कार्यालय में हुई इस लंबी पूछताछ में मुख्य बिंदु और खुलासे सामने आए हैं :-

पूछताछ में सामने आए मुख्य बिंदु

ट्रस्ट के फैसलों में भूमिका : नसीर अहमद खान से जौहर ट्रस्ट के संयुक्त सचिव के पद पर रहते हुए उनके द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उनसे पूछा कि ट्रस्ट के भीतर वित्तीय और प्रशासनिक प्रस्तावों को मंजूरी देने की क्या प्रक्रिया थी और क्या इसमें आजम खान का एकतरफा नियंत्रण था।

चंदे (Donations) और फंड का स्रोत: ईडी ने सपा विधायक के सामने ट्रस्ट को विभिन्न निजी फर्मों (11 प्रमुख संदिग्ध फर्मों), मेरठ की शिक्षण संस्थाओं और अन्य स्रोतों से मिले करोड़ों रुपये के चंदे से जुड़े दस्तावेज रखे। उनसे पूछा गया कि संयुक्त सचिव के तौर पर क्या उन्हें इन फंडों के वास्तविक स्रोत की जानकारी थी।

यनीवर्सिटी का निर्माण और सरकारी धन का उपयोग: पूछताछ का एक बड़ा हिस्सा यूनिवर्सिटी परिसर में हुए भारी-भरकम निर्माण कार्यों और उसमें लगे पैसे पर केंद्रित था। ईडी ने उन आरोपों पर सवाल किए कि तत्कालीन सपा सरकार के दौरान सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने कमीशन या चंदे के रूप में पैसा वापस ट्रस्ट में रूट किया था और क्या इस प्रक्रिया में विधायक की कोई भूमिका या जानकारी थी।

शत्रु संपत्ति और भूमि अधिग्रहण का मामला: जौहर यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों, किसानों की भूमि और कथित 'शत्रु संपत्ति' को ट्रस्ट के दायरे में शामिल किए जाने के फैसलों को लेकर भी उनसे तीखे सवाल-जवाब किए गए।

आजम खान के बयानों से मिलान

ईडी ने नसीर अहमद खान, सीए दीपक गोयल और कुलपति प्रोफेसर जहीरुद्दीन से पूछताछ में दर्ज किए गए बयानों के मुख्य अंशों और तथ्यों को रामपुर जेल में बंद आजम खान के सामने रखकर उनका आमना-सामना कराया। इसी कड़ी पूछताछ और बयानों में मिले विरोधाभासों के बाद ही ईडी की शिकायत पर आजम खान और जौहर ट्रस्ट समेत 5 के खिलाफ रामपुर के अजीमनगर थाने में 416 करोड़ रुपये के हेरफेर की यह नई बड़ी एफआईआर दर्ज की गई है।

टिप्पणियाँ (0)

सबसे पहले टिप्पणी करें।