छापेमारी और बरामदगी का पूरा ब्योरा
पकड़े गए दोनों तस्कर मूल रूप से बाराबंकी के रहने वाले हैं, जिनकी पहचान जुहेल (मोहम्मद जुहैल/ज़ोहेर) और मोहम्मद अमजद के रूप में हुई है। पुलिस और ANTF की टीम ने आरोपियों के पास से 6.400 किलोग्राम संदिग्ध मॉर्फिन (जिसमें 3.600 किलो सूखा पाउडर और 2.800 किलो गीला पदार्थ शामिल है)। एक अवैध .32 बोर पिस्टल और 6 जिंदा कारतूस। ₹16,170 की नगदी और 6 मोबाइल फोन। तस्करी में इस्तेमाल होने वाली एक हुंडई वेन्यू कार और एक स्कूटी। भारी मात्रा में केमिकल, तराजू और ड्रग्स फिल्टर करने के उपकरण।
बी-फार्मा पासआउट निकला मास्टरमाइंड
ANTF के पुलिस अधीक्षक (SP) चक्रेश मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों में से जुहेल ने बी-फार्मा की पढ़ाई की है। उसने अपनी फार्मास्यूटिकल जानकारी का इस्तेमाल इस अवैध ड्रग सिंडिकेट को खड़ा करने में किया।
पुलिस को चकमा देने का अनोखा तरीका: "रस्सी और बाल्टी"
जांच में खुलासा हुआ कि यह गैंग पुलिस की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाता था I ये लोग लखनऊ के बाहरी या ग्रामीण इलाकों में 4-5 महीने के लिए किराए पर मकान लेते थे, वहां लैब सेटअप करके मॉर्फिन साफ करते थे और फिर अचानक ठिकाना बदल देते थे। ड्रग्स की डिलीवरी देने के लिए ये खरीदार से सीधे नहीं मिलते थे। मकान की ऊपरी मंजिल से खिड़की के रास्ते रस्सी में बाल्टी बांधकर नीचे लटकाते थे। खरीदार उसी बाल्टी में पैसे रख देता था और ऊपर से ड्रग्स की खेप नीचे भेज दी जाती थी।
देशव्यापी नेटवर्क और कच्चे माल की सप्लाई
शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि इस ड्रग सिंडिकेट के तार पूर्वोत्तर राज्यों (गुवाहाटी और मणिपुर) से जुड़े हैं, जहां से ये अवैध कच्चा माल मंगाते थे। लखनऊ की इस सीक्रेट लैब में केमिकल प्रोसेस के जरिए अशुद्धियों को दूर कर फाइन ड्रग्स तैयार की जाती थी और फिर लखनऊ, बरेली तथा बाराबंकी समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी सप्लाई होती थी। दुबग्गा पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस सिंडिकेट के तीन अन्य मुख्य आरोपी (अनस, सोहेल और मांज) फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
दुबग्गा मॉर्फिन सिंडिकेट मामले में पुलिस लगातार अपने नेटवर्क को खंगाल रही है। फरार आरोपियों—अनस, सोहेल और मांज—की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों (जुहेल और अमजद) के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है। इससे फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों और उनके अंतिम लोकेशन का पता लगाया जा रहा है।
बैंक खातों और फंडिंग की जांच: पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस करोड़ों रुपये के ड्रग सिंडिकेट को चलाने के लिए पैसा कहां से आ रहा था। फरार आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क: चूंकि इस रैकेट के तार गुवाहाटी और मणिपुर से जुड़े हैं, इसलिए लखनऊ पुलिस और ANTF (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) वहां की स्थानीय पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से संपर्क कर रही है ताकि मुख्य सप्लायरों तक पहुंचा जा सके।
लखनऊ के अन्य इलाकों में हुए पिछले बड़े ड्रग ऑपरेशन्स
लखनऊ में अवैध ड्रग्स और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) लगातार बड़े अभियान चला रही है। पिछले कुछ महीनों में दुबग्गा की ही तरह, पुलिस ने लखनऊ के मड़ियांव इलाके में एक किराए के मकान पर छापा मारकर अवैध रूप से चलाई जा रही हेरोइन रिफाइनरी पकड़ी थी। वहां से भी करोड़ों रुपये की हेरोइन और केमिकल बरामद किए गए थे।
पॉलिटेक्निक चौराहे और चिनहट से ड्रग पेडलर्स की गिरफ्तारी: कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों को निशाना बनाने वाले एक गिरोह को चिनहट इलाके से गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे MDMA और चरस) बरामद हुई थी, जो पार्टियों और हॉस्टल्स में सप्लाई की जानी थी।
चारबाग और बस स्टेशनों पर चेकिंग: अंतरराज्यीय तस्करों द्वारा बसों और ट्रेनों के जरिए उड़ीसा और झारखंड से गांजा और अफीम लखनऊ लाने के कई मामलों का खुलासा जीआरपी (GRP) और स्थानीय पुलिस ने किया है।
