सरकार और दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के विकल्प के रूप में 3 नए ठिकानों (स्थलों) रामलीला मैदान (सेंट्रल दिल्ली), बुराड़ी मैदान (उत्तरी दिल्ली), सीबीडी (CBD) ग्राउंड (शाहदरा, पूर्वी दिल्ली) को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया है:
1. रामलीला मैदान (सेंट्रल दिल्ली): यह नया चुना गया ठिकाना पुराने जंतर-मंतर स्थल से सबसे नजदीक (लगभग 3 किलोमीटर दूर) है। इसका राजनीतिक रैलियों और अन्ना हजारे जैसे बड़े जन आंदोलनों का पुराना इतिहास रहा है।
2. बुराड़ी मैदान (उत्तरी दिल्ली): यह मैदान जंतर-मंतर से लगभग 21 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में स्थित है। साल 2020 में किसान आंदोलन के समय भी सरकार ने किसानों को यहीं प्रदर्शन करने का प्रस्ताव दिया था।
3. सीबीडी (CBD) ग्राउंड (शाहदरा, पूर्वी दिल्ली): यह कड़कड़डूमा कोर्ट और आनंद विहार के नजदीक पूर्वी दिल्ली का एक प्रमुख मैदान है, जो पुराने जंतर-मंतर स्थल से लगभग 13 किलोमीटर दूर है।
बदलाव का कारण और आगामी नियम:
सुरक्षा कारणों और लुटियंस दिल्ली (संसद के नजदीकी क्षेत्र) में ट्रैफिक व आम जनता को होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। दिल्ली पुलिस इन तीनों नए स्थानों पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन और सभाएं आयोजित करने के लिए जल्द ही एक नई विस्तृत गाइडलाइन और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करेगी।
जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने (De-notify) का फैसला सरकार और प्रशासन ने कई बड़े कारणों से लिया है। यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की एक विशेष समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद लिया गया है. सरकार द्वारा इस कदम को उठाने के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
अदालत का रुख: 9 अक्टूबर, 2026 को एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने टिप्पणी की थी कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण और कानूनी प्रदर्शन करने वालों के लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि इस क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों के लिए पर्याप्त शौचालय (Washrooms), पीने का साफ पानी और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. सॉलिसिटर जनरल ने भी अदालत को बताया था कि जगह तंग होने के कारण यदि कोई प्रदर्शनकारी बीमार पड़ जाए, तो वहां एम्बुलेंस तक का पहुँचना बेहद मुश्किल हो जाता है. इसलिए कोर्ट ने सरकार को किसी बड़े और खुले विकल्प को तलाशने का सुझाव दिया था.
उच्च सुरक्षा क्षेत्र और सुरक्षा चुनौतियाँ
जंतर-मंतर लुटियंस दिल्ली के दिल में स्थित है, जो संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय और कई वीवीआईपी (VVIP) सरकारी आवासों व सांसदों के घरों के बेहद नजदीक है. हाल के महीनों में भीड़ और बड़े आंदोलनों (जैसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दलों के प्रदर्शन) के कारण इस वीवीआईपी जोन की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतनी संवेदनशील जगह पर बार-बार भारी भीड़ जुटना ठीक नहीं है.
भारी ट्रैफिक जाम और आम जनता को असुविधा
जंतर-मंतर रोड कनॉट प्लेस (Connaught Place) जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र के करीब है. जब भी यहाँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते थे, तो आसपास की मुख्य सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लग जाता था. इससे दिल्ली के आम नागरिकों, दफ्तर जाने वालों और राहगीरों को रोज़ाना घंटों तक बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता था.
जगह की कमी और बढ़ती भीड़
· जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल वास्तव में एक सीमित और तंग सड़क (लेन) है, जहां अधिकतम 1,000 लोगों के जुटने की क्षमता निर्धारित थी.
· हाल के दिनों में प्रदर्शनों में जुटने वाली भीड़ इस सीमा से कहीं ज्यादा होने लगी थी. एक तंग सड़क पर हजारों की भीड़ को नियंत्रित करना दिल्ली पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद जोखिम भरा हो रहा था.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद
सरकार के इस फैसले पर देश में राजनीतिक बहस भी छिड़ गई है:
विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क: रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जंतर-मंतर की संसद से नजदीकी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत थी, जिससे जनता की आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँचती थी. प्रदर्शनों को शहर से 15-20 किलोमीटर दूर बुराड़ी जैसी जगहों पर भेजने से लोकतंत्र में जनता के विरोध जताने के अधिकार का असर कम होगा. प्रशासन का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाया नहीं जा रहा है, बल्कि रामलीला मैदान, बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड जैसे बड़े मैदानों पर प्रदर्शनकारी अधिक सुरक्षा, खुली जगह और बेहतर नागरिक सुविधाओं के साथ अपना विरोध दर्ज करा सकेंगे.
