यह सभी नियुक्तियां और फेरबदल उनके कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी माने जाएंगे.
राज्यपालों के तबादले
ओम प्रकाश माथुर: इन्हें सिक्किम के राज्यपाल पद से हटाकर अब केरलम् (केरल) का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर: ये पहले केरल के राज्यपाल थे, जिन्हें अब तमिलनाडु का स्थाई राज्यपाल बनाया गया है. (आर. एन. रवि के पश्चिम बंगाल तबादले के बाद से अर्लेकर वहां कार्यवाहक राज्यपाल की भूमिका निभा रहे थे).
नए नियुक्त किए गए राज्यपाल
बृज मोहन राम: इन्हें ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
डॉ. सुधा यादव: इन्हें कर्नाटक की नई राज्यपाल बनाया गया है.
डॉ. ढाल सिंह बिसेन: इन्हें उत्तराखंड की कमान सौंपी गई है और ये वहां के नए राज्यपाल होंगे.
दुष्यंत गौतम: इन्हें ओम प्रकाश माथुर की जगह सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
संक्षेप में पूरी सूची
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राज्य |
नए राज्यपाल का नाम |
स्थिति (नया/तबादला) |
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तबादला (पहले सिक्किम में थे) |
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तबादला (पहले केरल में थे) |
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नई नियुक्ति |
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नई नियुक्ति |
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डॉ. ढाल सिंह बिसेन |
नई नियुक्ति |
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नई नियुक्ति |
राज्यपाल की नियुक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम
भारतीय संविधान के मुताबिक राज्यपाल की स्थिति और नियुक्ति की प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
· संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत भारत के राष्ट्रपति सीधे तौर पर राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं.
· कार्यकाल: सामान्य तौर पर राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, लेकिन वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (जब तक राष्ट्रपति चाहें) ही अपने पद पर बने रह सकते हैं.
· तबादला: केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति कभी भी किसी राज्यपाल का कार्यकाल पूरा होने से पहले एक राज्य से दूसरे राज्य में तबादला कर सकते हैं. इस फैसले को किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती.
डॉ. सुधा यादव कर्नाटक का नया राज्यपाल
डॉ. सुधा यादव भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक बेहद प्रतिष्ठित और वरिष्ठ महिला नेता हैं, जिन्हें 12 अक्टूबर 2026 को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा कर्नाटक का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. वह कर्नाटक के वर्तमान राज्यपाल थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी. डॉ. सुधा यादव का जीवन व्यक्तिगत संघर्ष, देशभक्ति, उच्च शिक्षा और राजनीति में संगठनात्मक कुशलता का एक बड़ा उदाहरण है:
व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
जन्म व मूल निवास: डॉ. सुधा यादव का जन्म 16 अक्टूबर 1965 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गांव मोतला कलां में हुआ था. फिलहाल वे गुरुग्राम (गुड़गांव) की निवासी हैं.
कारगिल कनेक्शन और शहादत: उनका राजनीति में आना एक बड़ी पारिवारिक त्रासदी से जुड़ा है. उनके पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डिप्टी कमांडेंट थे, जो 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे. पति की शहादत के बाद ही उन्होंने सार्वजनिक जीवन और राजनीति में कदम रखा.
उच्च शैक्षणिक योग्यता (IIT से शिक्षा)
वे राजनीति में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी महिलाओं में से एक हैं. उन्होंने IIT रुड़की (IIT Roorkee) से 1987 में केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) में MSc की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने इसी प्रसिद्ध संस्थान से 1992 में केमिस्ट्री में PhD (डॉक्टरेट) की उपाधि भी प्राप्त की. उन्हें 'प्रेसिडेंट्स गाइड अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया जा चुका है.
राजनीतिक करियर और मुख्य उपलब्धियां
नरेंद्र मोदी ने बढ़ाया आगे: 1999 में जब उनके पति शहीद हुए, तब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा भाजपा के संगठन प्रभारी हुआ करते थे. उन्होंने ही डॉ. सुधा यादव के त्याग और योग्यता को देखते हुए उन्हें चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा था.
1999 में पहली बार सांसद: उन्होंने 1999 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव लड़ा और अहीरवाल क्षेत्र के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह को करीब 1.39 लाख वोटों के भारी अंतर से हराकर पहली बार 13वीं लोकसभा में सांसद चुनी गईं. वह 2004 तक सांसद रहीं.
पिछड़ा वर्ग आयोग में भूमिका: डॉ. यादव 2015 में भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय प्रभारी रहीं और साल 2019 से 2022 तक वे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य के तौर पर काम कर चुकी हैं. अगस्त 2022 में भाजपा ने डॉ. सुधा यादव को पार्टी के सबसे शक्तिशाली और शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय 'भाजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड' और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल किया. दिग्गज नेता सुषमा स्वराज के बाद इस शक्तिशाली बोर्ड में जगह पाने वाली वह देश की दूसरी महिला बनीं. अब देश के छठे सबसे बड़े राज्य (कर्नाटक) के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति को उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव, उनकी विद्वता और एक शहीद परिवार को मिलने वाले सर्वोच्च सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है.
ब्रज मोहन राम (ओडिशा के नए राज्यपाल)
ब्रज मोहन राम झारखंड और बिहार की राजनीति के एक वरिष्ठ और जमीनी नेता हैं, जिन्होंने ग्रामीण परिवेश से उठकर संवैधानिक पद तक का सफर तय किया है. यह मूल रूप से झारखंड के पलामू जिले के चंदवा (अब लातेहार जिला) के रहने वाले हैं. इन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से स्नातक (Graduation) की शिक्षा पूरी की है. ये अविभाजित बिहार में वर्ष 1991 से 1995 तक लातेहार विधानसभा सीट से विधायक (MLA) रहे. इसके बाद वे पलामू लोकसभा क्षेत्र से तीन बार लगातार (11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में) वर्ष 1996, 1998 और 1999 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए. वे संसद में कोयला, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण से जुड़ी कई समितियों के सदस्य रहे हैं. वर्तमान में वे झारखंड में भाजपा के अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे.
डॉ. ढाल सिंह बिसेन (उत्तराखंड के नए राज्यपाल)
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के एक बेहद अनुभवी और कद्दावर नेता हैं, जो लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) की जगह उत्तराखंड के 9वें राज्यपाल बनेंगे. इनका जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था. पेशे से यह एक डॉक्टर होने के साथ-साथ एक किसान और कृषि अर्थ विज्ञानी भी हैं. वे मध्य प्रदेश विधानसभा में 1990, 1993, 1998 और 2003 में चार बार विधायक चुने गए थे. वे 2003 से 2005 के दौरान मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री (स्कूल शिक्षा व अन्य विभाग) भी रहे. डॉ. बिसेन वर्ष 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष रहे. इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव में वे बालाघाट संसदीय क्षेत्र से भाजपा के सांसद (MP) चुने गए थे.
दुष्यंत गौतम (सिक्किम के नए राज्यपाल)
दुष्यंत गौतम भाजपा के एक बेहद प्रमुख दलित चेहरा और राष्ट्रीय स्तर के संगठनकर्ता हैं, जिन्हें ओम प्रकाश माथुर की जगह सिक्किम भेजा गया है. दुष्यंत गौतम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं.वे संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्य (MP) के रूप में देश सेवा कर चुके हैं. वह लंबे समय तक उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश प्रभारी के रूप में भी काम कर चुके हैं और केंद्रीय नेतृत्व में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
तबादला किए गए राज्यपाल
ओम प्रकाश माथुर (केरल के नए राज्यपाल): ओ. पी. माथुर भाजपा के सबसे वरिष्ठ सांगठनिक रणनीतिकारों में से एक हैं. वे राजस्थान से आते हैं और पीएम नरेंद्र मोदी व अमित शाह के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं. वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कई राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, गुजरात) के प्रभारी रहे हैं. जुलाई 2024 में उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया था, जहां से अब उनका तबादला केरल कर दिया गया है.
राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर (तमिलनाडु के नए राज्यपाल): राजेंद्र अर्लेकर गोवा के एक वरिष्ठ भाजपा नेता हैं और वे गोवा विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) व राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वे हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं. इसके बाद वे केरल के राज्यपाल बने और अब उन्हें तमिलनाडु का स्थाई राज्यपाल नियुक्त किया गया
