4 अक्टूबर 2026, रविवार
ब्रेकिंग
2027 वनडे विश्व कप का पूरा कार्यक्रम जारी -- 10 अक्टूबर को जोहान्सबर्ग में आमने-सामने होंगे भारत और पाकिस्तान जन्म-मृत्यु पंजीकरण : प्रक्रिया की सख्ती, अगर देरी की तो बनवाना बहुत मुश्किल i बीजेपी की रणनीति : विधान परिषद चुनाव में कैडर की जगह 'जिताऊ! PCS और APO भर्ती 2025 के परिणामों पर हाई कोर्ट की रोक! विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर गाँव ज़रूरी - नवचयनित अधिकारियों की ज़िम्मेदारियाँ 1,375 नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण
राजनीति

बीजेपी की रणनीति : विधान परिषद चुनाव में कैडर की जगह 'जिताऊ!

✍ Mamta Singh 📅 30 सितंबर 2026 👁 77 बार पढ़ा गया
बीजेपी की रणनीति : विधान परिषद चुनाव में कैडर की जगह 'जिताऊ!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। पार्टी ने साफ़ कर दिया है कि उसका एकमात्र लक्ष्य चुनाव जीतना है, चाहे इसके लिए बाहरी चेहरों को ही मैदान में क्यों न उतारना पड़े। बीजेपी ने मंगलवार को स्नातक और शिक्षक खंड की कुल 6 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।

पार्टी ने इस बार अपने पारंपरिक कैडर के कार्यकर्ताओं के मुकाबले जिताऊ और अनुभवी चेहरों को तरजीह दी है। सूची में बाहरी और शिक्षक संगठनों से जुड़े मजबूत चेहरों की संख्या सबसे ज्यादा है। पार्टी का मानना है कि मिशन-2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह चुनाव एक महत्वपूर्ण लिटमस टेस्ट है, इसलिए 24 का चुनाव चाल देखकर चला गया है।

टिकट वितरण का पूरा समीकरण: किसे कहाँ से मिला मौका?

बीजेपी ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों को बेहद सोच-समझकर चुना है:

स्नातक क्षेत्र 

वाराणसी स्नातक क्षेत्र सीट से पार्टी ने केदारनाथ सिंह को फिर से टिकट दिया है। वह 2004 से 2014 के बीच तीन बार एमएलसी रह चुके हैं और संगठन में अहम पदों पर रहे हैं।

गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक क्षेत्र से पार्टी ने तीन बार से चुनाव हार रहे कांग्रेसी पृष्ठभूमि के प्रमोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाकर चौंकाया है। मिश्रा के पास लंबा चुनावी अनुभव है, जिसे देखते हुए बीजेपी ने दांव खेला है।

मेरठ स्नातक क्षेत्र से दिनेश गोयल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि उनकी उम्र को लेकर पहले पार्टी में चर्चाएं थीं।

शिक्षक क्षेत्र

गोरखपुर-अयोध्या शिक्षक सीट से पार्टी ने शर्मा गुट के कद्दावर नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया है। वह 2008, 2014 और 2020 में भी जीत दर्ज कर चुके हैं।

इलाहाबाद-झांसी शिक्षक सीट से शर्मा गुट के अकेले एमएलसी रहे सुरेश कुमार त्रिपाठी के खिलाफ बीजेपी ने डॉ. बाबूलाल तिवारी को मैदान में उतारा है, जो हाल ही में माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद चर्चा में आए थे।

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से पार्टी ने डॉ. हरि सिंह ढिल्लो को प्रत्याशी घोषित किया है, जो पूर्व में छह माह के लिए सदन के सदस्य रह चुके हैं।

क्या हैं इसके सियासी मायने?

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें से 24 अक्टूबर को 11 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन 11 सीटों में से 6 सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

इस सूची से साफ है कि बीजेपी अब किसी भी तरह की गुटबाजी या कैडर के दबाव में आने के बजाय केवल 'जिताऊ क्षमता' (Winnability) को प्राथमिकता दे रही है। शर्मा गुट और अन्य शिक्षक संगठनों के प्रभावी नेताओं को अपने पाले में लाना या उनके सामने मजबूत विकल्प खड़ा करना इसी रणनीति का हिस्सा है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी का यह 'जिताऊ दांव' मतपेटियों में कितना कारगर साबित होता है।

टिप्पणियाँ (0)

सबसे पहले टिप्पणी करें।